Composition for the 60th birthday of my Mother-in-Law. (माधवी हरिसंगम)
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सासू मां की ये कहानी..
कवी जमाई सुनाये अपनी जुबानी..
समस्त ससुराल आज है समक्ष..
श्रोता गण जरा बरतें सावधानी...
शरद पूर्णिमा की शीतल रात्री..
पूर्ण चंद्रमा के रूप की भांती
नगरकरजी के घर हुंयी..
इक सुंदर कन्या की प्राप्ति ..
कोत्मा की कोठी मे बढती - खेलती वो किशोरी..
आई - बाबा के लिये मानो हो कोई स्वप्नलोक की परी..
सुधीर, सुनीता के संग धूम मचाये हर होरी..
सहेलियो संग बांधी सुंदर रिशतों की ये डोरी..
नागपूर आयी जब, सज धज के ये ससुराल..
घर आंगन संवरा ऐसे..जैसे जुही की मत्वाली डाल..
मीनल पंकज ने लायी खुशियो की वो बहार..
हरी के रंग मे रंग गया हरिसंगम परिवार..
निश्चय महत प्रयासों से ऐश्वर्या गारमेंट्स को
मिली अपनि अलग पेहचान...
लाइफ पार्टनर कम बिझनेस पार्टनर दे रहे ..
इस प्रगती में सहृदय योगदान..
कोतमा से कोतवाल नगर तक..
चली आ रही ये कहानी..
हमारे मन मंदिर में सदा बिराजे
ओम की सुष्मा नानी...
निर्मोही निरहंकारी मितभाषि
सुरुची अन्नपूर्णा जीवनदायिनी..
हमारे मन मंदिर में सदा बिराजे
ओम की सुष्मा नानी...
सहज सरल नितसुधा बरसाती
वो मधुर सुदा रस वाणी...
हमारे मन मंदिर में सदा बिराजे
ओम की सुष्मा नानी...
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